सकारात्मक स्लोगन (30)

स्नेह की थी डोर 
छल-कपट से दूर
बचपन की दोस्ती
बुढ़ापे तक पहुंची।।।।

शब्द एवं चित्र
श्रीमती रेणुका श्रीवास्तव 
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