देश का गौरव (गणतंत्र दिवस पर बाल कहानी)

गणतंत्र दिवस के पूर्व संध्या पर विभास अपने पापा के साथ बाजार गया था। बाजार में उसने देखा कि उसके यहाँ काम करने वाली आंटी का बेटा मोनू कागज और प्लास्टिक का बना झंडा साइकिल पर लगाकर बेच रहा था। विभास उससे दो झंडा खरीदकर ले आया। विभास जब भी कुछ खरीदता, उसे अपने भाई के लिए भी जरुर लेता।
घर आते ही विभास घर में घुसने से पहले अपना झंडा बाहरी फाटक के एक तरफ फहरा दिया। फिर वह दूसरा झंडा विपिन को देते हुए बोला," विपिन लो, ये तुम्हारा झंडा है। तुम इसे भी बाहर फाटक के दूसरी तरफ लगा दो, जैसे मैंने लगाया है। फिर दोनों झंडा हवा में लहराते हुए बहुत अच्छे लगेंगे।" 
विपिन झंडा पाकर बहुत खुश हुआ। वह झंडा हवा में लहराते हुए बोला,"नहीं भैया, मैं अपना झंडा आपको फहराने के लिए नहीं दूंगा। मैं इससे खेलूंगा।"

"तुम इससे खेलोगे? अरे यह खेलने की वस्तु नहीं है।  यह देश की शान है। यह हवा में लहराते हुए ही अच्छा लगेगा। इसे बाहर फहरा दो।" विभास तल्ख स्वर में बोला।
"अरे, जब मुझे मेरे मन का काम करने ही नहीं दोगे, तो फिर मेरे लिए लाये ही क्यों हो?" विपिन नाराज होकर बोला।
"मैं यह तुम्हारे खेलने के लिए नहीं लाया हूँ। इससे खेला नहीं जाता है। इसलिए लाओ इसे वापस कर दो।" विभास तल्ख स्वर में बोला।

"तीन रंगों वाला झंडा, चक्र के साथ बहुत सुंदर है। मैं इसे आपको वापस नहीं करुंगा, बल्कि पापा के कार पर लगा दूंगा।" यह कहकर विपिन भागने लगा। विभास उसके पीछे दौड़ा तो विपिन ठोकर खाकर गिर पड़ा। विपिन रोने लगा। विभास उसे उठाने लगा तो वह उसका हाथ झटककर बोला," जाओ, मैं तुमसे नहीं बोलता। तुमने मुझे गिरा दिया।" यह कहकर वह फिर रोने लगा। 
उसके रोने की आवाज सुनकर उसकी माँ भावना उसके पास आ गई, बोली," क्या हो गया? विपिन तुम क्यों रो रहे हो?"
विपिन और विभास की पूरी बात सुनने के बाद भावना बोली," बेटा, यह हमारा राष्ट्रीय ध्वज है। हमारे देश का गौरव है। इसलिए इससे खेलते नहीं, बल्कि इसका सम्मान करते है।"
"माँ मैं इसे पापा की कार पर लगाना चाहता था, पर भैया मुझे लगाने ही नहीं दे रहे थे।" विपिन अपने आँसुओं को पोछते हुए बोला।

"बेटा, यह हमारे देश की पहचान और गौरव है। हम इसे गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस या किसी भी सम्मानित अवसर पर फहराते है। इसके शान में कोई कमी न हो, इसलिए इसका पूरा सम्मान करते है।"
" मैं तो पापा के कार पर इसे सम्मान पूर्वक फहराना चाहता था, भैया ने उसके लिए ही क्यों मना कर दिया।" विपिन विभास की शिकायत करते हुए बोला।
" विभास को पता होगा, तभी वह तुम्हें मना कर रहा था। हमारे भारतीय झंडा संहिता में झंडा को सम्मानपूर्वक फहराने का नियम बताया गया है। इन्हीं नियमों में एक नियम यह है कि सिर्फ सरकार के महत्वपूर्ण व्यक्ति जैसे- राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, क्लास वन अफसर और भारत के प्रधान न्यायाधीश को छोड़कर कोई भी अपने वाहन पर झंडा नहीं लगा सकता है।" भावना बोली।

"लेकिन ऐसा क्यों करते है, माँ।" विपिन उत्सुकतावश पूछा।
"यह इसलिए करते है ताकि देश के गौरव में कोई कमी न हो।"
यह सुनकर विपिन बोला,"कल गणतंत्र दिवस है। स्कूल में झंडा फहराया जायेगा, खेलकूद प्रतियोगिता होगा, लड्डू मिलेगा। यह मुझे पता था। पर झंडा को कार पर नहीं लगा सकते है, यह पता नहीं था।" 
भावना विपिन को समझाते हुए बोली," बेटा हमारा देश 15 अगस्त 1947 (स्वतंत्रता दिवस) को अंग्रेजों के चंगुल से आजाद हुआ। इस आजादी के लिए हमारे देशवासियों ने बहुत समय से शांति वार्ता की, विद्रोह हुआ, संधर्ष किए,और फिर बहुत बड़ी-बड़ी कुर्बानियाँ दी, शहीद हुए, तब जाकर आजादी की स्वच्छ हवा में विचरण करना हमें नसीब हुआ।"

"मम्मी, जब हम 15 अगस्त को आजाद हो गये, तो हमें 26 जनवरी गणतंत्र दिवस की आवश्यकता क्यों पड़ी? हमें विस्तार में समझाकर बताईये।" विपिन उत्सुकता वश जानकारी के लिए पूछा।
तब भावना बोली,"  बेटा देश तो आजाद हो गया, पर देश में अभी तक अंग्रेजों के बने नियम ही चल रहे थे। अब आजाद भारत के लिए जरुरी हो गया कि उसके देश में उसका अपना नियम कानून हो। अतः डॉ० भीमराव अंबेडकर की अध्यक्षता में समिति द्वारा हमारे देश का अपना नियम और संविधान बना। यह संविधान हमारे देश में 26 जनवरी 1950 से लागू हुआ था। इसीलिए 26 जनवरी को हम गणतंत्र दिवस मनाते है और इसी दिन से हम अपने को पूर्ण रूप से स्वतंत्र मानते है। यह हमारा राष्ट्रीय पर्व है।"
"अच्छा, तभी यह पर्व हमारे स्कूल में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।" विपिन चहकते हुए बोला।
विभास जो अभी तक चुपचाप सुन रहा था, वह बोला," यह पर्व केवल स्कूल ही नहीं, बल्कि पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। सभी स्कूल, कालेज, दफ्तर और विभिन्न महत्वपूर्ण स्थलों पर झण्डारोहण, खेलकूद, रंगारंग कार्यक्रमों द्वारा इसे मनाते है। दिल्ली में इस दिन महामहिम राष्ट्रपति के सामने से परेड और विभिन्न राज्यों की झांकियाँ गुजरती है। इस कार्यक्रम में किसी नामी हस्ती को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाते है। अपने देश और विदेश के बहुत से नागरिक दूर-दूर से इसमें सम्मिलित होने आते है।"
"अरे वाह भैया, आपको तो बहुत जानकारी है।" विपिन उत्साहित होकर बोला।
"हाँ बेटा, विभास को जानकारी थी, तभी तो वह तुम्हें कार पर झंडा लगाने के लिए मना कर रहा था।" भावना बोली।

"मम्मी,भईया मुझे ठीक से समझा नहीं पाये थे, तभी तो मैं समझ नहीं पाया। अब आपने मुझे ठीक से समझा दिया तो मैं समझ गया।"
भावना बोली," बेटा, प्रत्येक देश का एक गौरव होता है, जिसका प्रतीक उसका राष्ट्रीय ध्वज होता है। हमारे देश का गौरव हमारा राष्ट्रीय ध्वज...हमारा राष्ट्रीय तिरंगा है, जिसे राष्ट्रीय पर्व के दिन बड़े धूमधाम व सम्मान से फहराते है। इसलिए हम ऐसा कोई काम नहीं करते है, जिससे हमारे राष्ट्रीय तिरंगा के गौरव के सम्मान में कहीं कोई कमी रह जाएं। इसलिए उससे खेलना, तोड़ना और फेंकना मना है।"
"माँ, आप कितनी अच्छी है। आपने गणतंत्र दिवस की महत्ता समझा दिया तो सारी बातें समझ में आ गई। भैया को तो समझाना ही नहीं आता है। आज मेरी समझ में आया कि हमेशा परेड के समय जब किसी बच्चे से उसका झंडा गिर जाता है तो अध्यापक उसे झटपट उठा लेते है। अब हम बड़े धुमधाम से गणतंत्र दिवस मनायेंगे।"

विभास बोला,"हाँ मम्मी, मैं भी गणतंत्र दिवस पर बहुत से खेल में और वाद-विवाद प्रतियोगिता में भाग ले रहा हूँ। आप आशीर्वाद दीजिएगा कि मैं विजयी बनूं।"
"बहुत अच्छा बेटा, मुझे तुम दोनों से यही उम्मीद थी। अब तुम अपनी तैयारी करो। मेरा आशीर्वाद सदैव तुम्हारे साथ रहेगा। अब मैं काम करने जा रही हूँ।" भावना पूर्ण विश्वास से बोली।
"माँ, मैं भैया के साथ झंडा बाहर फाटक पर फहराने जा रहा हूँ। आप अपना काम करिए।"
भावना दोनों बच्चों के सर पर हाथ फेरती हुई चली गई तब विपिन विभास के साथ बाहर झंडा फहराने चला गया।

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