स्वयं से प्यार करो (कविता)

बोझ तले दबकर ऐ नारी, तुम,
न भूलों अपने अस्तित्व का मान।
भाव उल्लसित करके मन का,
अपना मान भी सर्वोच्च करो। 

जैसे सब है तुमको दिल से प्यारे,
वैस ही स्वयं से अनुराग करो।
खाना खिलाना तुम्हारा फर्ज है,
पर स्वयं भूखे न सो जाओ तुम।

शारीरिक श्रम है बहुत जरुरी,
पर थककर चूर मत हो जाओ तुम।
आराम की जरूरत है जैसे सबको,
तुम भी विश्राम को गले लगा लो।

सबको जी भरकर प्यार करो,
पर देखो,कौन करता है तुमको प्यार।
रिश्ते की भूलभुलैया में फँसकर,
स्वयं पर अत्याचार न होने दो।

ऐसे स्नेहसूत्र में बाँधों सबको,
बँधनें को आतुर हो जाए सब। 
यही तुम्हारा प्यार है स्वंय से,
सुगंध अपना बिखराओ तुम।

श्रद्धा व विश्वास की सुंदर भावना,
अपने उपर भी बरसाओ तुम।
जग में अपनी विद्वत्ता की,
नींव जमाकर दिखला दो, तुम।
 

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