कोरोना वायरस की उलटी गिनती (व्यंंग्य)

पहले जब हम कहीं से अपने सोच में,व्यवहार में और कार्यों के क्रियान्वयन में कभी भी अपने को पॉजिटिव पाते थे, तब हम बहुत खुश होते थे। क्योंकि पॉजिटिव मतलब सकारात्मक सोच और ऊर्जा। यह उर्जा हमारे कार्य करने की क्रियाशीलता को आगे उन्नतिशील गति प्रदान करती थी, तब हमारे कदम सफलता की सीढ़ियाँ चढ़कर पहली पादान पर पहुँचने की चेष्टा में जी तोड़ मेहनत करने के जुगत में जी जान से जुट जाते थे।
जब हमारे आगे बढ़ते कदम हमारे सफलता की सीढ़ियों की संख्या कम करते हुए पहली पादान की ओर बढ़ते थे, तब हम सफलता की कसौटी पर अपने को खरा समझकर स्वयं को उत्तम व खुशनसीब मानते थे। यह हमारी उपलब्धि, सोच-समझ, कार्यशैली के सफलता की सीधी व श्रेष्ठ गिनती होती थी।

पर कोरोना वायरस ने हमें गिनती ही उलटी और गलत सिखा दिया है। जब हम पॉजिटिव है, तब हम दुखी, परेशान और मुसीबतों से घिरें हुए आक्रोशित, हैरान और डरे हुए है अर्थात हम कोरोना रोग कोविड-19 से ग्रसित और बीमार है। 
यदि हम विश्व में आकड़ो में उँचे पादानों की ओर बढ़ रहे है तब हमारी मुस्किलें भी तीब्र गति से आगे बढ़ रही है। पहले हम नम्बर नौ पर थे। धीरे-धीरे जब हमारी स्थिति तीसरे पादान पर पहुँचे तो हमारी चिंता बढ़ गई क्योंकि यह कोरोना काल की उलटी गिनती ही हमें गलत राह पर बढ़ा रही है। यहाँ हमारा लक्ष्य पहले पादान पर पहुँचना नहीं बल्कि पहले पादान से दूर बहुत दूर भागना है, तभी हम सफल और सुरक्षित कहलायेंगे।और कोरोना वायरस के रोग कोविड-19 मुक्त होंगे।

वाह रे कोरोना काल की उलटी गिनती। हम तुम्हारी प्रतिभा को मान गये है। तभी तुम्हारी उलटी ही उलटी जयकारा अर्थात क्षयकारा होगी। क्योंकि तुमने हमारे सफलता के राह को ही मोड़कर उलटा कर दिया। हम तुमसे भयभीत है। बहुत डरे हुए भी है। अब हम ना तो पॉजिटिव होना चाहते है और ना ही कोरोना वायरस से ग्रसित होकर कोरोना के सफलता के पहले पादान पर पहुँचना चाहते है।

इसलिए हे कोरोना महरानी... हमें पॉजीटिविटी का पाठ पढ़ाने वाली...हमें अपनी गिनती के अनुसार निगेटिव ही रहने दो और सफलता के नीचली पादान पर खड़े होकर ही यदि हम सुरक्षित है, तो हमें वहीं खड़ा रहने दो। बहुत हो गया तुम्हारा तांडव। अब हमें बर्बाद करना छोड़ दो। अब तुम हमें अपने मायाजाल से मुक्त कर आजाद हवा में विचरण करने की अनुमति दो, ताकि तुम्हारे मारे जाने या विलुप्त हो जाने की उम्मीद में हम खुली हवा में सांस ले सके और सफलता की सही गिनती, जो अभी तक हम पढ़ते व सीखते आ रहे थे, उसी को पढ़ने, समझने और गतिशील बनाने में सफल होकर अपनी पुरानी जिंदगी जीने के लिए पूर्ण रुप से सफल व स्वतंत्र हो जायें। 
तभी तुम्हारे कुचक्रों के जाल से मुक्त होने का हमारा लक्ष्य, हमारा सपना और अपनी उन्मुक्त खुशी को हम पूर्णता से पा सकेंगें।

1 comment:

Unknown said...

Bahut sahi