बिल्ली की म्याऊँ-म्याऊँ (बाल कविता)

बिल्ली बोली मैं तो,भैया,
म्याँऊ-म्याँऊ करती हूँ।
नहीं किसी से कभी मैं ड़रती,
सबके घर में घुस जाती हूँ।
खामोशी से आगे बढ़ती,
नजरें यूं ही दौड़ाती हूँ।
दूध मलाई जब पा जाती,
झट से चाट जाती हूँ।
चूहें की चीं-चीं सुनके,
मैं सतर्क हो जाती हूँ।
बिना किसी आहट के,
उसको चट कर जाती हूँ।
मुन्ना-मुन्नी मुझे खोजते,
मैं चुपके से छुपजाती हूँ।
जैसे ही मौका मिलता है,
नौ दो ग्यारह हो जाती हूँ।
              

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