मेरी अच्छी मम्मी (बाल कविता)

मम्मी है मेरी, सबसे अच्छी, 
अनोखी और निराली है।
रोज सुबह वे मुझे जगाती,
फिर प्यार से सहलाती है।
ओस की नन्हीं बूंदों जैसी,
मधुर स्नेह से नहलाती है।
दुलार-पुचकारकर मुझको,
सजाती और सँवारती है।
प्रेम से भोजन कराके,
प्रतिदिन स्कूल पहुँचाती है।
खेलने और कूदने के लिए,
पार्क मुझे ले जाती है।
दोस्तों के संग खेलता देख,
वह हर्षित हो मुस्काती है।
मेरी छोटी गुस्ताखी पर,
आँखें तरेर गुर्राती है।
हल्की चपत लगा करके,
सीने से चिपकाती है।
ताकत है, मेरे जीवन की,
जिनके बल पर पलता हूँ।
पढ़ता और बढ़ता हूँ,
लायक बच्चा कहलाता हूँ।

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