वक्त (कविता)

वक्त बहुत बड़ी चीज है,
उलट-पुलट की चमत्कार है।
वक्त की डोर में बंधे,
हम घुमने को मजबूर है।
वक्त एक एहसास है,
जिसमें जीत और हार है।
वक्त एक अनोखा पल है,
जिसमें खुशी और गम है।
वक्त अनचाही बदलाव है,
जो रोते को हँसाता है।
वक्त एक पनाह है,
बिगड़े को बनाता है।
वक्त के चकरघिन्नी में,
हम नाचने रह जाते है।

No comments:

शंखनाद (कविता)