पड़ोसी के आम का पेड़ (बाल कविता)

मेरे पड़ोसी के आँगन में,
एक आम का पेड़ है।
जिस पर लटके आमों को देख,
मैं बौराया रहता हूँ।
आँखें मलते रोज सुबह,
इस उम्मीद में जागता हूँ।
टपका पड़ा हो कोई आम,
मेरे आँगन वाले भाग में।
जब मिल जाता है, एक आम,
मैं हर्षित होकर खाता हूँ।
जो स्वाद है, इस आम में,
उसकी खुशी अनमोल है।
अब मैंने अपने आँगन में,
लगाया आम का पेड़ है।
बड़ा होकर जब यह भी,
टपकायेगा ढ़ेरों आम,
तब मेरे घर के बूढ़े-बच्चे,
खाकर मौज मनायेंगे।
 

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