नन्हें चूहें की शैतानी (बाल कविता)

पेट फुलाया, पैर पसारा,
बिल्ली ने ली अंगडाई।
नन्हें व दुबले चूहें को,
बात समझ में न आई।
उसने बोला बिल्ली से,
तुम क्यों हो अलसाई।
काम करो, मेहनत करो,
मुझे पकड़कर दिखलाओ।
गुस्सा आई बिल्ली को,
वह चूहे पर गुर्रायी।
आँख तरेरी, दाँत दिखाई,
गुस्से से बौखलायी।
उठते बिल्ली को देखकर,
होश उड़ गया चूहे का।
हुआ पसीने से लथपथ,
फिर झटपट दौड़ा भागा।
बिल के पास पँहुच करके,
बिल्ली को ठेंगा दिखलाया।
देखकर चूहे की शैतानी,
बिल्ली गई खिसिया।
चूहे के नन्हें से बिल में,
वह घुस नहीं पायी।
चूहे-बिल्ली की ये शैतानी,
हमको बहुत रास आयी।

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