सूरज सा चमचम चमको (बाल कविता)

सूरज ने कुछ सोचकर,
बनायी अपनी दिनचर्या।
सुबह का सबसे पहला काम,
पूरब में रोज निकलना है।

अपनी छटा बिखेरकर ,
काम सभी के आना है।
दिनभर कड़ी मेहनत करके,
पश्चिम में छुप जाना है।

पूरी रात विश्राम करके,
अगली सुबह फिर जागना है।
जागना है, फिर जुटना है,
आलस्य में नहीं फँसना है।

सूरज की तरह जब तुम भी,
दिनचर्या अपनी बनाओगे।
आलस्य का परित्याग करोगे,
हिम्मत का हुंकार भरोगे।

सही समय पर काम करोगे,
अमल करके दिखलाओगे।
मुट्ठी में पाओगे,अपनी मंजिल,
सूरज सा ही चमचम चमकोगे।

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