औरत (कविता)

ऐ औरत तू क्या है?
तेरे कितने रुप है? 
बहन है, बेटी है
पत्नी है या है माँ 
किस रुप में तेरा मान करु
किस रुप में तेरा सम्मान करु
किस रुप में पुजू तुम्हें 
किस रुप में तेरी अर्चना करु
बहन बन के अर्पित है
बेटी बनकर समर्पित है
बीवी बन के सहयोगी है
माँ बन कर त्यागी है तू
तेरा हर रुप सुहाना है
हर रुप तेरा निराला है
हर रुप में तू मतवाली है 
हर रुप में तू शक्तिशाली है
हर रुप सबको प्यारा है
हर रुप तेरा स्वीकार है
ममतामयी प्रेम की छाया है
तू जीवन की ज्योति है
पुरुष हरदम ढ़ूढ़ता है तुझमें
एक संरक्षण भरा सुखी जीवन।

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