दोस्त हो तो पल्लवी जैसी (बाल कहानी)

जयश्री इण्टर कालेज में एक ही कक्षा में पढ़ने वाली दो लड़कियाँ थी सुनिधि और पल्लवी। पड़ोसी होने के कारण  वे एक ही वैन से स्कूल जाती थी। साथ रहने, समान रुचि एक साथ आने-जाने के कारण वे शीघ्र ही पक्की दोस्त बन गयी। अब वे अपना समय भी अधिकतर साथ ही बिताती थी। 
एकबार कालेज में जिला स्तर पर कला प्रतियोगिता का आयोजन होने घोषणा हुई। कला में रुचि लेने वाले विद्यार्थी इसमें भाग ले सकते थे। प्रत्येक कक्षा से पाँच विद्यार्थियों को ही फाइनल के लिए चुनना था। 
सुनिधि और पल्लवी के कक्षा में होड़ सी लग गयी। सभी विद्यार्थी अच्छे अच्छे चित्र बनाकर अपनी कक्षाध्यापिका का दिल जीतने का प्रयास करने लगी। ताकि उनका नाम फाइनल प्रतियोगिता के लिए चुने छात्राओं में आ जाये। कला के क्षेत्र में सुनिधि और पल्लवी दोनों का आर्ट बहुत सुंदर था। वे दोनों जमकर अभ्यास करना शुरु कर दी।
सुनिधि और पल्लवी दोनों एक साथ एक ही तरह का चित्र बनाती और चित्रों का अवलोकन करती। सुनिधि देखती कि पल्लवी का आर्ट हमेशा उससे ज्यादा सुंदर, साफ और आकर्षक बनता है। प्रतिस्पर्धा की आड़ में सुनिधि के मन में विकार उत्पन्न होने लगा। वह पल्लवी से जलने लगी।  धीरे-धीरे सुनिधि उदास रहने लगी। उसे महसूस हुआ कि वह पल्लवी से कभी आर्ट में जीत नहीं पायेगी। इसलिए वह दुखी भी हो जाती और अभ्यास में उतनी तत्परता नहीं दिखा पाती जितना उसे दिखाना चाहिए था। सुनिधि के मन की उथल-पुथल को पल्लवी समझने लगी।
वह चित्र बनाते समय सुनिधि के हौसला को बढ़ाती और कहती," सुनिधि, तुम अभ्यास करना जारी रखों। जीत किसकी होगी यह कोई कह नहीं सकता है। पर कड़ी मेहनत और लगन से किया गया अभ्यास कभी बेकार नहीं होता।" यह कहकर वह सुनिधि को आर्ट की तरफ रुचि बढ़ाती। और अधिक मेहनत करने पर बल देती। पल्लवी सुनिधि के कमियों को उजागर करके उसे दूर करने का प्रयास करती। इस प्रकार पल्लवी के उत्साहवर्धन से सुनिधि की आर्ट दिन प्रतिदिन निखरनें लगी। सुनिधि का डर और दुख दोनों दूर हो गया। अब वह मन लगाकर अभ्यास में मन लगाने लगी। दोनों सहेलियाँ पूरी तत्परता से अपने अभियान में जुट गई। 
पल्लवी के समझाने पर सुनिधि में जो सुधार हुआ उसके कारण कक्षा में चुनी गई पाँच छात्राओं में सुनिधि और पल्लवी का नाम भी शामिल था।
प्रतियोगिता के ठीक एकदिन पहले पल्लवी जब सुनिधि के घर आयी तो सुनिधि यह देखकर दंग रह गयी कि पल्लवी के हाथ में पट्टी बँधी हुई है और वह काफी उदास है। सुनिधि के पूछने पर पल्लवी ने बताया कि सीढ़ियों से गिरने के कारण उसके हाथ में चोट लग गयी है इसलिए वह प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पायेगी। पल्लवी सुनिधि के हौसला को बढ़ाती और समझाती रही कि उसे पूरे उत्साह से प्रतियोगिता में भाग लेना है। 
अगले दिन प्रतियोगिता में भाग लेने सुनिधि अकेले गई। पल्लवी के साथ न होने की वजह से वह बहुत दुखी थी। प्रतियोगिता समाप्त होने पर सुनिधि बहुत खुश थी। वह मन ही मन अपने आर्ट के प्रति आश्वस्त नजर आने लगी।
घर आकर सबसे पहले वह पल्लवी के घर गई। उसने पल्लवी को बताया कि उसकी वजह से आज वह प्रतियोगिता में अच्छा आर्ट बना पाई। पर पल्लवी के भाग न लेने के कारण वह बहुत दुखी है। पल्लवी ने कहा, "उसके हिस्से में प्रतियोगिता में शामिल होना नहीं था इसलिए उसे चोट लग गई। वैसे मैं खुश हूँ कि तुमने पूरी लगन से प्रतियोगिता में भाग लिया।" 
थोड़ी देर बाद सुनिधि अपने घर आ गई। वह थक गयी थी इसलिए नाश्ता करके आराम करने लगी।
दूसरे दिन स्कूल पहुँचने पर जब सुनिधि ने पल्लवी को देखा तो उसके हाथ में कोई चोट नहीं था। सुनिधि के पूछने पर पल्लवी ने बताया कि उसका चोट ठीक हो गया है। सुनिधि ने पल्लवी के झूठ को भाँप लिया। उसके मन में पल्लवी के प्रति अपार स्नेह उमड़ने लगा, पर उसने उसे उजागर नहीं किया।
दो-चार दिनों बाद प्रतियोगिता का रिजल्ट प्रिंसिपल मैम ने प्रार्थना सभा में बताया। प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली नलिनी, द्वितीय स्थान पाने वाली विजेता का नाम सुनिधि तृतीय स्थान पाने वाली नुतन थी। तीनों छात्राओं के मंच पर आने के बाद हाल तालियों से गूंज गया। पल्लवी जोर जोर से ताली बजाने लगी। पर सुनिधि जब स्टेज पर पँहुची तब वह आँसुओं से तर थी। उसने अपने इनाम की असली हकदार पल्लवी को बताया। उसने मंच से सबको बताया कि उसके और पल्लवी में यदि जीत किसी की होती तो वह पल्लवी की होती। पल्लवी ने उसके लिए चोट का बहाना बनाकर अपने को प्रतियोगिता से बाहर कर लिया था।ताकि सुनिधि की जीत सुनिश्चित हो सके। इसलिए यह सम्मान पल्लवी को मिलना चाहिए।  प्रधानाचार्य महोदया ने पल्लवी को मंच पर बुलाया और उससे पूछा कि उसने ऐसा क्यों किया? पल्लवी जब स्टेज पर आयी तो उसके आँखों में खुशी के आँसू थे। उसने सभी के सामने यह स्वीकर किया कि वह  सुनिधि को उदास नहीं देख सकती थी। सुनिधि के हौसलाअफजाई के लिए उसने अपने डाक्टर अंकल की मदद से चोट का स्वांग रचा ताकि इनाम सुनिधि को ही मिले।
यह सुनकर थोड़ी खामोशी के बाद हाल तालियों से गुंज गया। प्रधानाचार्य महोदया ने उसकी भूरी-भूरी प्रशंसा किया। सुनिधि ने पल्लवी को इनाम का पैकेट पकड़ा कर उसे गले लगा लिया। दोनों के दोस्ती की चर्चा पूरे कालेज में होने लगी। पल्लवी दोस्ती की एक मिशाल बन सबके आँखों की तारा बन गयी।

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शंखनाद (कविता)