फुलकारी (लेख)

फुलकारी भांति-भांति के बेल-बुटो से सजी एक ओढ़नी होती है, जिसमे जिन्दगी के विभिन्न पहलुओं के सभी भाव, सभी रंग छिपे होते है। बचपन में यह चटकीले रंगों वाले फूलो और तितलियों जैसे आकृतियों से मन मोहती है, तो युवावस्था में अपने मादक व् मनमोहक रूप से सबको लुभाती और आकर्षित करती है।
एक विवाहिता इसके घुंघट में लजाती है, मुस्कुराती है और अपना सुन्दर सलोना मुखड़ा छुपाती है। कभी-कभी इसी की आड़ में छुपकर वह सबसे नज़ारे चुराकर अपने पति का दीदार करती है।
एक ममतामयी माँ अपना सम्पूर्ण प्यार और दुलार इसके पहलु में समेटती है, तो कोई दादी-नानी स्नेह से लबालब इसके आँचल में अपने नन्हें-मुन्ने, गुड्डे-गुडियों से मासूम पोते-पोती और नाती-नतनी को छुपाकर उनके अठखेलियों से अपने अधुरे सपनों को साकार करने का प्रयास करती है और मजा लेकर उनमे निहित होकर अपने भविष्य का मजबूत स्तम्भ तैयार करती है।

अत: एक स्त्री का सम्पूर्ण अस्तित्व उसका सम्पूर्ण वजूद इसके आगोश में समाहित होता है। लज्जा छुपाने का यह ठोस आवरण है तो कड़ी धुप में साया देकर साथ निभाने वाली संगिनी भी है। 

संक्षेप में कहा जाये तो फुलकारी एक स्त्री के सम्पूर्ण जीवन के सभी पक्षों के उतार-चढ़ाव एवं रंगो को अपनी गोद में समेटे है। 

मैंने जब लिखना प्रारम्भ किया तब मै जिंदगी के विभिन्न पहलुओं का विस्तृत अनुभव प्राप्त कर चुकी थी...खट्टे-मीठे, तीखे-रसीले। जो बीत गया...भूतकाल के उन्हीं बीते विस्मृति अनुभवों से वर्तमान में जीती हुई , भविष्य को रंग बिरंगी फूलों वाली फुलकारी की तरह सजाती हुई रंगीन करना चाहती हूँ, जिसके रंग बिरंगे बुटों में सुन्दरता हो, मादकता हो, जो  खिलता सा हो, खिलखिलाता सा हो, महकता सा हो और चारो तरफ अपना सुगंध फैलाकर जीवन का संवागीर्ण  विकास कर उर्जावान बनाने वाला हो।

अत: ऐसी ही रंग-बिरंगी, फूलों से सजी अपनी फुलकारी
वेबसाइट (http://www.renukasrivastava.com) और
का मैंने सृजन किया। "फुलकारी" जीवन के विभिन्न रूपों के प्रति मेरे नजरिए, मेरे अनुभवों और मेरे दिल से उमड़-घुमड़ कर निकलने और बरसने वाले उद्गारों  को व्यक्त करने का एक माध्यम है, जिसे विभिन्न लेखों, व्यंग्यों, कविताओं, कहानिओं और चित्रों में ढ़ालने, सजानें और सँवारने का मेरा लघु प्रयास निरन्तर जारी रहेगा.......।

1 comment:

Unknown said...

Good job

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