बुद्धिमान कौवा (लघुकथा)

1.गरमी का मौसम था। तेज धूप से बेहाल एक कौवा घने छांव वाले वृक्ष को ढ़ूढ़ रहा था। तभी उसे एक वृक्ष दिख गया।
2.कौवा पेड़ की डाल पर बैठ गया। वह बहुत प्यासा था। पानी की तलाश में वह चारों तरफ देखने लगा।
3.तभी उसे दूर जमीन पर पड़ा हुआ एक घड़ा दिखा। घड़े को देखकर वह बहुत खुश हो गया।
4.कौवा उड़कर घड़े के पास आया और घड़े के अंदर देखने लगा। उसे घड़े में पानी नहीं दिखा।
5. कौवा उड़कर घड़े पर बैठ गया उसे घड़े में पानी बहुत  कम दिखा।
6. पानी कौवा के चोंच के पहुँच से बाहर था।
7. कौवा निराश नहीं हुआ। वह पेड़ की डाल पर बैठकर पानी पीने का उपाय  ढ़ूढ़ने लगा।
8 उसी समय कौवा को पेड़ के नीचे बहुत सा कंकड दिखा।
9.कंकड़ देखकर कौवा के मन में एक उपाय सूझा।
10. कौवा नीचे आया। वह कंकड़ को चोंच में दबाकर घड़े पर बैठ गया।
11. कौवा कंकड़ को घड़े में डाल दिया। अब वह बार-बार चोंच से कंकड़ पकड़ता और लाकर उसे घड़े में डाल देता।
12. कौवा के उपाय ने रंग दिखाना शुरु कर दिया। घड़े में पानी धीरे-धीरे उपर आने लगा।
13. अब कौवा उत्साहित होकर पूरे लगन से कंकड़ लाता और घड़े में डाल देता।
14. पानी घड़े के मुँख तक आ गया तब कौवा बहुत खुश हो गया।
15. कौवा को अपने  बुद्धि और प्रयास से पानी मिल गया। पानी पीकर कौवा ने अपनी जान बचा ली। और डाल पर बैठकर आराम करने लगा।
16. मुसीबत में बुद्धि के सही प्रयोग और प्रयास से कठिन से कठिन काम भी सरल हो जाता है।

No comments:

शंखनाद (कविता)