लाॅकडाउन की आवश्यकता (कहानी)

"माँ, मुझे पार्क में खेलने जाना है, अभी-इसी समय।" माँ के साड़ी का आँचल पकड़कर मचलता हुआ विवेक बोला।
" देखो, पार्क में इस समय कोई बच्चा नहीं है। इसलिए तुम भी पार्क नहीं जा सकते हो।"
"लेकिन क्यों? हम बच्चों से कौन सी भूल हो गई है जिसकी सजा हमें मिल रही है? " विवेक जिद पर अड़कर बोला।
राधिका काम में व्यस्त थी इसलिए विवेक से अपना पीछा छुड़ाने के लिए बोली, "लो ये रिमोट लेलो और जाओ, जाकर कार्टून देख लो।"
" नहीं माँ नहीं। मैं रिमोट नहीं लूंगा। पहले आप कार्टून फिल्म देखने को स्वयं मना करती थी। अब जब देखो तब यही कहती फिर रही है कि कार्टून देख लो। मैं कार्टून देखते-देखते बोर हो चुका हूँ। आप पहले मुझे समझाईयें कि हम केवल घर में क्यों रहे?हम पार्क में क्यों नहीं जाये?"
" बेटा, मैं तुम्हारे पापा को चाय बनाकर दे आऊं, फिर मैं तुम्हें विस्तार से समझाती हूँ कि तुम्हें पार्क में जाने से क्यों रोका जा रहा है।"
" ठीक है। मैं यहीं बैठकर आपकी इंतजारी कर रहा हूँ।" विवेक चुपचाप बिस्तर पर लेट गया। 
रसोईघर में जाती राधिका पलटकर देखी तो उन्हें मेज पर पड़े रिमोट को देखकर कहावत याद आ गई 'अति बुरी बला है।' वरना इसी रिमोट के लिए कितनी छिना झपटी मच जाती थी। आज विवेक का मन कार्टून से उचट चुका है। वह बोर होने लगा था इसलिए वह बार-बार राधिका से उलझ रहा था। राधिका भी विवेक के मनोस्थित से परिचित थी। 
चाय बनाकर राधिका सीधे विवेक के पास आई तो देखी कि विवेक गहन मुद्रा में कुछ सोच रहा है। राधिका ने सोच लिया था कि उन्हें विवेक को समझाना पड़ेगा। वरना आधी-अधूरी ज्ञान के कारण उसमें कुंठा विद्यमान हो जायेगी। और वह इस समय मची विपदा को ठीक से समझ नहीं पायेगा। 
राधिका विवेक से बोली, "बेटा, तुम कार्टून के अतिरिक्त कुछ देखते नहीं हो इसलिए तुम यह समझ नहीं पाये कि आज विश्व में क्या चल रहा है? मैं तुम्हें समझाती हूँ, तब तुम अच्छी तरह समझ जाओगे कि आज घर में रहना क्यों इतना जरूरी है।" 
"हाँ माँ, आप मुझे समझाईयें कि हमें इस तरह घर में क्यों रहना पड़ रहा है?" विवेक माँ के पास आकर उनके आँचल को पकड़कर उत्सुकता से पूछा। 
"आज विश्व एक वैश्विक महामारी के जाल में फँस गया है। यह महामारी कोरोना नामक वायरस के कारण होती है। इसके लक्षण देखने में सर्दी-खाँसी और बुखार जैसे ही है, पर ये जानलेवा बहुत है। जिसकी वजह से बहुत से लोग इसके जाल में फँस चुके है। वैसे यदि ठीक से देखभाल की जाए तो इससे ठीक भी हुआ जा सकता है और थोड़ी सावधानी रखने पर इसे फैलने से रोका भी जा सकता है।  अभी तक इसका कोई विशेष दवा या सूई नहीं बना है जिसके कारण इसकी रोकथाम का कारगर उपाय सम्भव नहीं है। यही कारण है कि विश्व में बहुत से लोग इसकी चपेट में फँस कर अपनी जान गवां चुके है।अतः जागरुक होना और इसके रोकथाम के लिए कारगर कदम उठाना बहुत जरूरी हो गया है। "
" यह ठीक है, माँ कि ये जानलेवा बीमारी चारों ओर फैली हुई है पर इसके डर से हम घर में कैद क्यों है? "
" बेटा, तुम घर में कैद कहाँ हो? तुम्हें तो यह सुनहरा मौका मिला है कि तुम घर में बैठकर अपनी उस प्रतिभा को निखार सको जिसके लिए तुम्हें अभी तक समय नहीं मिल पाता था।"राधिका विवेक को दुलराती हुई बोली। 
"माँ, आप असली मुद्दा से भटक गयी। आप घर में टिकने का कारण बताने वाली थी और आप समय की सदुपयोगिता बताने लगी। हम समय का अच्छा उपयोग तो करेंगे ही, पर पहले यह तो जान ले कि यह हमारे लिए जरूरी क्यों है।"
" हाँ बेटा, मैं भटक गयी थी। ये कोरोना वायरस संक्रमित करने वाला अदृश्य वायरस है। यह संपर्क में आने पर बहुत जल्दी दूसरे व्यक्ति में चला जाता है।और किसी को पता भी नहीं चलता जब तक कि उसके लक्षण न स्पष्ट हो जाये। संक्रमण के कारण यह बहुत तेजी से लोगों में फैलने लगा है अतः कोई दूसरा व्यक्ति किसी बीमार व्यक्ति के संपर्क में न आये क्योंकि यह छींकने से जो बूंदें निकलती है उनके संपर्क में आने से और हाथ मिलाने से संक्रमित होता है।  इसलिए सरकार ने जनता की भलाई के लिए और जनमानस से सोसल डिस्टेंसिंग को मनवाने के लिए लाॅकडाउन की घोषणा की है।"
" ओह माँ, आप बहुत अच्छी है। आप ने मेरा भ्रम थोड़ा-बहुत दूर कर दिया। लेकिन मैं सब कुछ विस्तार में जानना चाहता हूँ।" विवेक आग्रह करते हुए बोला।
" हाँ-हाँ समझाती हूँ। थोड़ा धैर्य रखो।" राधिका लम्बी सांस लेकर बोली।
" सोसल डिस्टेंसिंग कैसे सम्भव हो? इस पर जब विचार-विमर्श हुआ तब यही उचित लगा कि लाॅकडाउन की घोषणा कर दी जाए ताकि सभी लोग अपने-अपने घरों में सुरक्षित हो जाये। इसके लिए स्कूल, कालेज, बाजार, माॅल, सिनेमाघर और भीड़भाड़ वाली सभी धर्म स्थलों को पूर्ण रूप से बंद कर दिया गया। ताकि भीड़ एक जगह इकट्ठी न हो सके।"
"यह सोच तो बहुत अच्छी है। इस पर अमल जरुर होना चाहिए। "
" हाँ बेटा, तुम ठीक समझे। घर से निकलना हो तो मास्क या किसी साफ सूती कपड़े से नाक मुँह को ढ़क जरुर ले। अपने हाथ को बार बार साबुन से धुलें या सेनेटाइज करें। जिससे वायरस के संपर्क में आने की संभावना को कम किया जा सके। इस बीमारी को बढ़ने से रोकना बहुत  बड़ी जिम्मेदारी और चुनौती बन गयी है। इसलिए इस समय हर कार्य को समझदारी और सूझबूझ से करना जरुरी हो गया है।"
" माँ, अब मैं आपकी बातों को काफी हद तक समझ गया हूँ। लाॅकडाउन की महत्ता भी मेरे दिमाग में घुस गयी। मैं अब आप को परेशान नहीं करुंगा। विभिन्न प्रकार के कामों में अपने को व्यस्त रखते हुए समाचार भी सुनुगा ताकि विश्व और अपने देश मे होने वाली घटनाओं की जानकारी मिल सके। "
" वाह, तुम तो बहुत समझदार हो। अब मैं काम करने जाऊं।"
" हाँ माँ, आप जाइये। मैं भी जा रहा हूँ एक पोस्टर बनाने।बना लूंगा तो आपको दिखाऊंगा। हम घर में रहेंगे और सुरक्षित रहेंगे।" यह कहकर विवेक अपने कमरे में चला गया। राधिका मंद-मंद मुस्कुराती हुई उसे देखती रही फिर अपने काम में जुट गई। 

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