शमशेर की दहाड़ (बाल कहानी)

कानन वन में शमशेर नाम का एक शेर रहता था। शमशेर के गुफा के पास ही खल्लू खरगोश का बिल था। खल्लू अपने मम्मी - पापा के साथ अपने बिल में रहता था। खल्लू बहुत डरपोक था। उसे शमशेर के दहाड़ने पर बहुत डर लगता था। शमशेर अपने गुफा में दहाड़ता और खल्लू डरता था अपने बिल में। खल्लू अपने मम्मी-पापा से जिद करता कि हमें यह बिल छोड़कर दूसरी जगह बिल बनानी चाहिए। पर खल्लू के मम्मी-पापा उसे समझाते कि हमें डरकर जीना नहीं चाहिए। शमशेर हमारा कुछ नहीं बिगाड़ेगा। वह जंगल का राजा है। वह बड़े-बड़े जानवरों का शिकार करता है। उसे हमारे जैसे छोटे जानवरों से कुछ लेना-देना नहीं होता। वह अपने तरीका से अपनी जिंदगी जी रहा है और हम अपने तरीका से अपने बिल मस्त है।"
 यह सुनकर खल्लू बोला, "मस्त आप होंगी मम्मी। मैं तो हमेशा डरता ही रहता हूँ। न जाने शमशेर हम पर कब हमला कर दे।"
" शमशेर जब दिख जाए तब तुम भागकर अपने बिल में घुस जाना। शमशेर तुम्हारे बिल में घुस नहीं पायेगा इसलिए तुम सुरक्षित हो। तुम्हें शमशेर से ड़रने की कोई जरुरत नहीं है। "
खल्लू के मम्मी-पापा उसे हमेशा समझाते रहते थे कि डर डरकर जीना ठीक नहीं होता। बहादुर बनों... बहादुर। पर खल्लू के मन में जो डर समाया था, वह बाहर निकलता ही नहीं था। 
एकदिन खल्लू अपने दोस्त गोलू कुत्ता से मिलने उसके घर जा रहा था। तभी उसे शेर के दहाड़ने की आवाज सुनाई पड़ी। खल्लू डर गया। वह डरकर काॅपता हुआ अपने बिल में घुसकर अपने बिस्तर में छुप गया। उस समय वह घर में अकेला था। इसलिए वह और अधिक डरा हुआ था। 
       इधर गोलू खल्लू की इंतजारी करते हुए जब परेशान हो गया, तब वह खल्लू को ढ़ूढ़ता हुआ उसके घर पहुँच गया। गोलू जोर से भौंकते हुए खल्लू-खल्लू चिल्लाने लगा। 
गोलू की आवाज सुनकर खल्लू को हिम्मत आया, तब वह बिस्तर से निकलकर बिल के बाहर आ गया और गोलू से बोला, " गोलू तुम बहुत सही समय पर यहाँ आये हो। मैं अकेला था और बहुत डर रहा था। तुम्हें देखकर थोड़ी हिम्मत आयी है।" 
"यहाँ तो मुझे कोई दिख नहीं रहा है। फिर तुम किससे डर रहे थे?" गोलू खल्लू से बोला। 
"मैं तुमसे मिलने तुम्हारे पास आ रहा था, तभी शमशेर की दहाड़ सुनाई पड़ी तो मैं बिल में घुसकर छुप गया। अब तुम आ गये तो मुझमें हिम्मत आयी है।"
" किसी भी डरावनी आवाज पर खतरा के आने का अनुभव होता है। खतरा आता नहीं है। खतरा जब सामने हो, तब भी डरते नहीं है बल्कि उस खतरें से कैसे बचें यह सोच कर उसपर तुरंत अमल करना चाहिए। डर को छोड़ो, चलो, खेलने चलते है। "
गोलू और खल्लू दोनों मैदान में खेलने चले गये। मैदान में और भी बहुत से जानवर बच्चे थे। सभी ने मिलकर खूब मस्ती मारी, फिर शाम होते ही सब अपने घर को चल दिए। गोलू जब अपने घर को जाने लगा, तब खल्लू गोलू से बोला," गोलू, तुम  ही मुझे लेकर आये थे, इसलिए तुम ही मुझे घर तक छोड़ने चलोगे।"
"नहीं खल्लू , तुम बहादुर बनों। और अपने आप अकेले ही घर जाओ।" 
"कह तो तुम ठीक ही रहे हो दोस्त, पर हिम्मत नहीं होती है।" 
गोलू खल्लू से बोला, "जब तक तुम्हें कोई नुकसान न पहुचावें तब तक तुम्हें डरने की कोई जरूरत नहीं पड़नी चाहिए। शमशेर अपने गुफा में गुर्राता है और तुम मैदान में खेल रहे थे। अब तुम अपने घर जा रहे हो। वह अपने गुफा में है। फिर ये डर कैसा? यह डरपोक लोगों का काम होता है। तुम डरते क्यों हो? "
शेरु के कहने पर खल्लू बोला," दोस्त, तुम समझा तो रहे हो, पर जब शमशेर दहाड़ता है, तब मुझे लगता है कि शमशेर अपने भयानक रुप में मेरे सामने खड़ा है। यह एहसास ही मुझे डरने पर मजबूर करता है। "
"एहसास पर मत डरो। जब शमशेर तुम्हारे सामने आये, तब तुम डरने की अपेक्षा कैसे उससे बचोगे। यह उपाय सोचो और फिर उस हिसाब से भाग जाओ। "
गोलू के समझाने पर खल्लू घर की तरफ चल तो दिया। पर वह डरता हुआ जा रहा था।
अचानक खल्लू को चेली चुहिया और गट्टू गिलहरी मिल गये। दोनों छुपनछुपाई खेल रहे थे। खल्लू को उनका खेल देखने में मजा मिलने लगा। अचानक कहीं से बिंदों बिल्ली चेली पर झपट्टा मारी तो चेली उछलती हुई कूद पड़ी और झटपट अपने बिल में घुस गयी। बिंदों खिसियाती हुई चेली के बिल के पास रुककर चेली की इंतजारी करती रही। तो गट्टू सामने पेड़ की डाल पर और खल्लू झाड़ियों के पीछे से बिंदों के जाने की राह देखते रहे। काफी देर होने पर जब बिंदों निराश होकर चली गई, तब चेली मुस्कुराती हुई बिल से बाहर निकली। इस मुसीबत की घड़ी में भी चेली के चेहरे की मुस्कुराहट पर खल्लू को आश्चर्य हुआ। वह चेली से बोला, "चेली, क्या तुम्हें बिंदों से डर नहीं लगता है?"
चेली बोली, "डरना कैसा? बस अपने दुश्मनों से सतर्क रहना पड़ता है। मैं हरपल सतर्क रहता हूँ। जब चूक जाऊंगा तब की तब देखी जायेगी। अभी से उस चिंता में मरना कैसा?"

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