जलीय पक्षी बत्तखें (बाल कहानी)

कौशल अपने मम्मी-पापा और दादी-बाबा के साथ लोहिया पार्क घुमने गया। घुमते हुए जब पार्क में झूला दिखा तो कौशल झूला झुलने की जिद करने लगा। दादी कौशल को लेकर पार्क में चली गयी। पार्क में झूला झूलते समय क्वे क्वे की तेज आवाज सुनाई पड़ी। दादी कौशल को झूला झूला रही थी।आवाज सुनकर कौशल मचल उठा। वह उत्साहित होकर दादी से पूछा," दादी, ये कैसी और किस पक्षी की अजीब आवाज है। मैंने ऐसी आवाज पहले कभी नहीं सुना था। इसलिए इस पक्षी को दिखा दीजिए।"
दादी बोली,"हाँ बेटा, जरुर दिखाऊंगी। यह बत्तखों की आवाज थी। जो यहीं कहीं पास में ही झुंड़ में होंगें। तभी इनकी आवाज सुनायी पड़ी थी। चलो हम चलकर उन्हें ढ़ूढ़ते है।"
यह कहकर दादी कौशल को लेकर आगे बढ़ी तो उन्हें एक सुंदर सा बड़ा तालाब दिख गया। तालाब में सात-आठ बत्तखें और मछलियाँ भी तैर रही थी। तालाब के चारों तरफ जाली का बाउंड्री बना था, जो सिर्फ एक जगह पर बने दरवाजे के कारण खुला था।
कौशल मछलियों और बत्तखों को देखने में रम भी गया। उसे मछलियों के साथ बत्तखों का तैरना बहुत अच्छा लग रहा था।
थोड़ी देर बाद दादी ने कौशल को बताया कि बत्तख एक जलीय पालतू पक्षी है। यह झील, तालाबों और समुंद्र के पानी में रह सकता है।
बत्तखों के प्रति कौशल की जागरूकता बढ़ गयी। वह दादी से बोला,"दादी, बत्तखों को लोग पालते क्यों है?"
कौशल के प्रश्न का जवाब दती हुई दादी बोली ,"इसके अंड़े और मांस बहुत पौष्टिक होते है। अपने इसी स्वार्थ के लिए लोग इन्हें पालते है। ताकि उन्हें स्वास्थ्यवर्धक अंड़े और मांस मिल सकें।"
कौशल फिर बोला,"जब लोग इसे पालते है तो ये खाता क्या है?"
"बेटा, ये सर्वहारी होते है जो अनाज,जलीय पौधे, छोटी मछलियाँ और पानी में रहने वाले कीड़े मकौड़े खाती है।" दादी बोली।
दादी से मिले इस जानकारी के कारण कौशल की उत्सुकता बढ़ने लगी। वह दादी से और अधिक जानकारी पाने के उम्मीद में बोला," दादी, बत्तखें तो आकार में बड़ी होती है। ये अपने पंख को भी फैला नहीं रही है फिर ये पानी में आसानी से तैरती कैसे है?"
"बेटा, इनके पैर की अंगुलियाँ आपस में जुड़ी होती है। यही पैर पानी में आगे पीछे करती हुई पतवार का काम करती है। इसी के कारण बत्तखें खामोशी से आगे तैरती तो है पर कैसे ..यह हमें दिखती नहीं है। यही कारण है कि ये आगे बढ़ती हुई हम लोगों को बहुत अच्छी लगती है।"
"आप ठीक कह रही है ,दादी। झुंड़ में तैरती हुई सफेद बत्तखें बहुत अच्छी लग रही है। एक बात और बताईये दादी, इसके पंख तो बहुत बड़े दिख रहे है। यह पानी में भीगकर भारी हो जाते होंगे, फिर तो इन्हें अपने ड़ूबने का डर सताता होगा।"
"नहीं बेटा, इसे यह डर सताता ही नहीं, क्योंकि इसके पंख जलरोधक होते है जो पानी में भी गीले नहीं होते। यही कारण है कि पंख हल्के होने के कारण यह पानी में आसानी से तैरता है । हर पक्षी को अपने वातावरण के अनुसार रहने और जीवनयापन की सुविधा मिलती है तभी वे अपने वातावरण से समक्षौता कर पाते है। ये पानी में ड़ूबकी भी लगाते है तभी इनके आँखों में तीन पलकें होती है। हंस और कलहंस जो देखने में बहुत सुंदर होती है वे भी इन्हीं के प्रजाति में आती है।"
"ये तो बहुत अच्छी जानकारी आपने मुझे दी है दादी। अब मैं अपने दोस्तों को भी ये बातें बताऊंगा ताकि वे भी पार्क में आकर बत्तखों को देख सकें।"
"तुम हो बहुत अच्छा और प्यारा बच्चा। तभी तुम्हें अपने साथ साथ अपने दोस्तों की भी चिंता है। ज्ञान बाँटना बहुत अच्छी हाबी होती है । मुझे खुशी है कि तुममें यह गुण है।"
कौशल दादी से बातें करने में व्यस्त था तभी उसे पीछे से क्वे क्वे की आवाज जोर से सुनने को मिला। कौशल पीछे मुड़कर देखा तो तालाब के सामने ही कुछ दूरी पर बहुत से सफेद बत्तखों में कुछ बैठे थे और कुछ खड़े थे। कौशल दौड़ता हुआ उनके पास गया और साथ में लाये हुए लईया को जमीन पर छिट दिया। सारी बत्तखें दौड़ती हुई आ गयी और लईया को क्वे-क्वे के शोर के साथ खाने लगी। कुछ बत्तखें कौशल के पीछे पड़ गयी। वे क्वे-क्वे करते हुए कौशल को चारों तरफ से घेर ली। दादी दौड़ती हुई आयी और कौशल को बाहों से घेरकर बत्तखों को भगाने लगी। दादी बोली," बेटा ,इस तरह पक्षी या जानवर को बिना समझे बुझे कुछ देना नहीं चाहिए वरना ये चोट भी पँहुचा सकती है।आइंदा से ऐसी गलती मत करना।"
"साँरी दादी,अब मैं ऐसी गलती नहीं करुंगा।"
उसी समय बत्तखों का रखवाला भी आ गया। उसने अपनी छड़ी और विचित्र सी आवाज के साथ बत्तखों को एकत्र किया और बाड़े में बंद कर दिया। बाड़े की धूप में कुछ बततखें आराम से लेट गई।, कुछ खड़ी-खड़ी ही आवाज निकालती रही, पर दो-चार अपने दरबें में जाकर आराम फरमानें लगी।
कौशल दादी के साथ खड़ा होकर बत्तखों के बाड़े में जाने का लुफ्त उठाता रहा। फिर वह  दादी की अंगुली पकड़कर वहाँ से आगे बढ़ गया।

No comments:

शंखनाद (कविता)