लाॅकडाउन का नन्हा योद्धा (कहानी)


 कल मृदुल का रिजल्ट निकलने वाला था। वह अति प्रसन्न और उत्साहित था क्योंकि इस बार उसका पेपर बहुत अच्छा हुआ है।  इसलिए यदि उसका नंबर अच्छा आया, तब वह मम्मी-पापा से अपने पसंद का उपहार लेगा। वह मन ही मन में ख्याली पुलाव पकाने लगा कि वह उपहार में मम्मी-पापा से क्या-क्या फर्माइश करेगा। मृदुल का मन किसी एक उपहार पर टिक नहीं रहा था। वह असमंजस की स्थिति में भटक रहा था तभी उसकी मम्मी सृष्टि हाथ में मोबाइल पकड़े प्रगट हो गई। वह मृदुल से बोली, "मृदुल, आओ  देखो। तुम्हारा रिजल्ट मेरे मोबाइल पर मेल से आ चुका है।"
"मेल से? लेकिन क्यों मम्मी। रिजल्ट तो कल निकलने वाला था फिर ये आज क्यों आ गया।" मृदुल आश्चर्य से बोला।
"अरे,ये तो स्कूल वाले जाने। हमें तो रिजल्ट से मतलब है। जब रिजल्ट आ ही गया, तो आकर देख ले।" सृष्टि आग्रह करके बोली।
"माँ, जब आप देख ली तो मैं देखकर क्या करुंगा?" मृदुल सर झुकाकर बोला।
मृदुल रिजल्ट के नाम पर इतना निराश होगा, यह सृष्टि को समझ में नहीं आया। वह मृदुल को उत्साहित करने के लिए बोली," तेरा नंबर बहुत अच्छा आया है। आकर एकबार देख तो ले। "
" नहीं माँ, मैं नहीं आऊंगा। मैं पास हूँ.. यह मुझे पता है। " मृदुल वहीं बैठे-बैठे बोला।
"अरे, कल तक तो तुम अपने रिजल्ट के लिए बहुत उतावले थे। इस समय तुम्हें क्या हो गया जो तुम इसे देखना भी नहीं चाहते।" सृष्टि समझ नहीं पायी कि मृदुल को क्या हो गया है, जो वह बिलकुल उत्साह नहीं दिखा रहा है।
"माँ, मैं उत्साहित था कि मैं स्कूल तुम्हारे या पापा के साथ जाऊंगा। दोस्तो से मिलूंगा। सबका नंबर देखूंगा फिर मनोरंजन करते हुए गिफ्ट की फर्माइश करुंगा। मेरे तो सारे उम्मीदों पर पानी फिर गया। इस लॉकडाउन ने तो सारा बना बनाया सिस्टम ही उलट-पलट दिया। " मृदुल रुआँसा हो गया।
सृष्टि जल्दी से मृदुल के पास आई और उसके चेहरा को हथेलियों से पकड़कर अपने तरफ करती हुई बोली," बेटा, तुम्हारा नंबर अच्छा आया है। फिर तुम्हें निराश होने की कोई आवश्यकता नहीं है। हम तुम्हें वही गिफ्ट देंगे जो तुम लेना चाहोगे।"
" कल लेकर क्या करुंगा। आज की खुशी के लिए पूरे साल मेहनत किया था पर इस लाॅकडाउन ने सारे उम्मीदों को फिस्स कर दिया। मुझे इस समय आपसे बोलना अच्छा नहीं लग रहा है। आप मुझे छोड़कर जाइये यहाँ से।" मृदुल खिजता हुआ बोला तो सृष्टि को भी गुस्सा आ गया। वह भी झल्ला कर बोली,"गुस्सा मेरे पर क्यों उतार रहा है? मैं जा रही हूँ। पड़े रहो अकेले।"
सृष्टि गुस्से में बोलने को तो बोल गयी पर समझ गयी कि मृदुल इस समय चिड़चिड़ाया हुआ है। इसलिए उससे इस समय कुछ बोलना ठीक नहीं है। वह रिमोट मृदुल को पकड़ाते हुए बोली," मृदुल कार्टून फिल्म देख लो।इस समय बहुत अच्छी पिक्चर आ रही है।" मृदुल ने रिमोट पकड़ा नहीं तो वे रिमोट को वहीं बिस्तर पर छोड़कर बाहर आ गयी।
थोड़ी देर बाद सृष्टि कमरे में गयी तो देखी मृदुल गहरी नींद में सोया हुआ है। वह उल्टे पांव लौट आयी और अपने काम में व्यस्त हो गयी।
अपने माँ-बाप का इकलौता बेटा मृदुल लाॅकडाउन की इस विषम परिस्थित में अकेलेपन के कारण काफी घबड़ाया हुआ था। यद्यपि सृष्टि उसका ध्यान बराबर रखती थी पर घर के कामों को निबटाने में गाहे-बगाहे व्यस्त रहना उनकी मजबूरी थी अतः वे मृदुल का साथ वैसा नहीं दे पाती थी जैसा वह चाहता था।
काम की अधिकता से सृष्टि थक गई तो आकर मृदुल के बगल में लेट गयी। अधकचरे नींद में मृदुल करवट बदला और माँ के गले में बाहें डाल दिया। सृष्टि उसके बालों को सहलाते हुए सो गयी।
शाम को जब सृष्टि की नींद खुली तब वह चुपचाप बिना आहट किए उठ गई। सृष्टि को मृदुल के लिए कुछ ऐसा करना था जिससे उसकी सोच बदले और क्रियाशील होकर वह कुछ सकारात्मक काम कर सके। सृष्टि ढ़ेर सारे रंगीन क्राफ्ट का पेपर, थर्मोकोल, फेवीकोल, पेंसिल, रबड़, स्केल और बड़ी सी दफ्ती लाकर मृदुल के मेज पर लाकर सजा दी।
मृदुल की नींद खुली तो मेज पर ढ़ेर सारे सामान को सजा देखकर चौंक गया। वह दौड़ता हुआ माँ के पास गया और बोला,"मम्मी, मेरे मेज पर इतना सामान क्यों रक्खी है। मैं इन चीजों का क्या करुंगा?"
सृष्टि बोली," ठहरों, मैं तुम्हें अभी समझाती हूँ। आज के विषम परिस्थितियों में जब हम लोग लाॅकडाउन के कारण घर में है और हमारे पास कोई विशेष काम नहीं है, तब अपने हौसला को बुलंद करने के लिए हम सभी को किसी ना किसी क्रियेटिव काम में भाग लेना चाहिए।"
" लेकिन मम्मी, जब हम लोग लाॅकडाउन में है तब भी बहुत से लोग ऐसे है जो इस समय भी अपना काम कर रहे हैं।" मृदुल कुछ सोचकर बोला।
" हाँ बेटा, वैश्विक महामारी के ऐसे कठिन समय में जब सभी लोगों को घर में संयम व सुरक्षित रहने को कहा जा रहा है, तब ऐसे में देश के डाक्टर, नर्स, पुलिस मैन, सफाईकर्मी, भोजन बनाने और लोगों तक पहुँचाने वाले लोग अपनी अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभा रहे है। इनके पास इस समय ढ़ेरों काम है। ये आज के कर्मवीर योद्धा है। हमारे-तुम्हारे पास ऐसा कोई काम नहीं है। तुम्हारे पास कोई और बच्चा भी नहीं है, जो तुम्हारे साथ कोई गेम खेल सके। इसलिए ऐसे में तुम्हारे जैसे अकेले रहने वाले बच्चे यदि कोई क्रियाशील काम करके अपने को सकारात्मक व व्यस्त रखता है और अपने मनोबल को सुदृढ़ बनाये रखता है, तो वह इस समय का नन्हा क्रियाशील योद्धा कहलायेगा।"
" ठीक है मम्मी, अब आप ही बताइए कि हम करे तो क्या करे, जिससे हम भी क्रियाशील योद्धा बन सकें। " मृदुल अधिरता से पूछा।
" ठीक है। मै सोचती हूँ कि हम लोग कुछ नया और क्रियेटिव कौन सा काम करें, जिसमें मन भी लगे और वह सुंदर और सबको आकर्षित करने वाला भी हो।"
" माँ, हम लोग ऐसा क्या बना सकते है जो सुंदर और मनमोहक लगे।" मृदुल उत्साहित होकर बोला।
"क्यों ना हम लोग इन समानों से एक सुंदर सा घर बनाते है। फिर उसे सजाते है। तुम आइडिया सोचों। मैं जल्दी से काम निबटाकर आती हूँ, फिर हम मिलकर काम करेंगें।" सृष्टि काम करते हुए बोली।
" हम घर तो बना लेंगें फिर हम इस घर का करेंगे क्या? " मृदुल को घर की उपयोगिता समझ में नहीं आई तो वह सृष्टि से प्रश्न पूछ बैठा।
" घर हमारे लिए एक क्रिएटिव काम रहेगा और हमारा
मनोबल भी सकारात्मक रहेगा। एक बात और है- स्कूल खुलने पर अपने बनाये क्राफ्ट को अपने दोस्तों को दिखाने में भी तुम्हें बहुत खुशी और संतुष्टि मिलेगी और हमारे ड्राइंगरूम की शोभा बढ़ाने के लिए एक सुंदर शोपीस अपने हाथ का बनाया हुआ भी मिल जायेगा।"
" मम्मी, आप बहुत अच्छी है।" यह कहकर मृदुल सृष्टि को चूम लिया।
मृदुल मेज के पास गया और उस पर रखे सामानों को उलट-पलट कर देखने लगा।  विभिन्न प्रकार के सामानों को देखकर वह उत्साहित होने लगा। मृदुल अपने निर्माणाधीन घर की कल्पना में डूब गया। वह कागज और पेंसिल लेकर अपने घर का स्केच बनाने लगा। मृदुल के कड़ी मेहनत के बाद मृदुल के घर का नक्शा बन कर तैयार हो गया। सृष्टि जब काम निबटाकर आई तो घर का नक्शा देखकर बहुत खुश हुई। वे मृदुल से बोली," अरे, तुम तो बहुत बड़े आर्किटेक हो। इतना सुंदर नक्शा बना डाले। अब हम इसी नक्शे के आधार पर अपना घर बनायेंगे।"
सृष्टि के सहयोग से मृदुल थर्मोकोल को  काटने और जोड़ने लगा। दिन के दो-तीन घंटा निर्माणाधीन घर के निर्माण में बीतने लगा। लाॅकडाउन में मायूस अकेले रहने वाले मृदुल को अब व्यस्त रहने का एक उद्देश्य मिल गया। वह व्यस्त व मस्त हो गया। वह खुशी-खुशी अपने घर को निहारता और उसे नये रुप में सँजाने की कल्पना में डूब जाता फिर वैसे ही वह अपने घर को नये रुप में सँजाता। कई दिनों के कड़ी मेहनत के बाद मृदुल का घर बन गया और फिर वह सँवर भी गया। इस बीच मृदुल को आभास भी नहीं हुआ कि लाॅकडाउन का कितना दिन गुजर गया है।
मृदुल अपने घर का फोटो अपने दोस्तों और मम्मी के फैमिली ग्रुप में साथ साथ शेयर किया तो सभी ने बहुत अच्छे-अच्छे कमेंट दिये। मृदुल उस कमेंट को पढ़कर बहुत खुश होता। एक क्रियेटिव काम से मृदुल का समय भी अच्छी तरह बीत गया। और उसका मनोबल भी उँचा हुआ।
अब मृदुल के दोस्त भी अपने बनाये क्रियेटिव चीजें वाट्सएप पर भेजकर शेयर करने लगे। एकदिन मृदुल के एक दोस्त ने मोबाइल पर गाना सुनाया तो मृदुल को भी जोश छा गया। मृदुल करोना पर स्लोगन बनाकर दोस्तों से शेयर करता और फिर उसे अपने बनाये पोस्टर में अंकित करने लगा। घर के बाद अब दोस्तों में पोस्टरों, स्लोगन और गाने की होड़ लग गई।
लाॅकडाउन के कारण मृदुल में जो मनोविकार आने लगा था उससे सृष्टि काफी चिन्तित हो गई थी। घर में मृदुल अकेला था। लाॅकडाउन के कारण कोई किसी के घर आ जा नहीं सकता था। अतः मृदुल को व्यस्त रखने का जो उपाय सृष्टि ने ढ़ूढ़ा, वह कारगर सिद्ध हुआ। मृदुल अब अपने क्रियेटिव कामों में व्यस्त रहने लगा। सृष्टि विभिन्न प्रकार के पकवान बनाती तो मृदुल उसमें भी मदद करता था।
एक अकेला मृदुल विभिन्न प्रकार के क्रिएटिव कार्यों के कारण लाॅकडाउन के इस विषम परिस्थितियों में अकेला नहीं रह गया। मोबाइल के कारण वह सोशल मीडिया और माँ के कारण घर के कामों से जुड़ गया। अब वह जागरुक और प्रसन्नचित्त रहने लगा। लाॅकडाउन का खौफ भी अब अकेले रहने वाले मृदुल को सताना भूल गया। और वह लाॅकडाउन का नन्हा योद्धा भी बन गया।

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